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रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ने तेल कंपनियों के लिए खोली विशेष डॉलर विंडो

इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल को 12 अक्टूबर से नामित बैंकों के ज़रिये डॉलर मिलेंगे। विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव के नियम भी बदले गए हैं।

मुंबई में भारतीय रिज़र्व बैंक की इमारत
मुंबई में भारतीय रिज़र्व बैंक की इमारत (फ़ाइल फ़ोटो)। फ़ोटो: Sailko / Wikimedia Commons, CC BY 3.0

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने सरकारी क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष डॉलर विंडो खोलने का फ़ैसला किया है। इंडियन ऑयल (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) इसके ज़रिये कच्चे तेल के आयात समेत अपने रोज़ के कामकाज के लिए ज़रूरी डॉलर ले सकेंगी।

यह व्यवस्था सोमवार, 12 अक्टूबर से अगले आदेश तक लागू रहेगी। डॉलर की बिक्री आरबीआई की ओर से तय किए गए बैंकों के माध्यम से होगी। कुल राशि और हर लेनदेन की सीमा नहीं बताई गई है।

डेरिवेटिव के नियम भी बदले गए हैं। कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है, ताकि बड़ी पोज़ीशन असली हेजिंग की ज़रूरतों से जुड़ी रहें और सट्टेबाज़ी पर लगाम लगे। एक्सचेंज पर होने वाले रुपया करेंसी डेरिवेटिव भी इसके दायरे में हैं।

रुपये से जुड़े जिन विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों का नोशनल मूल्य 20 लाख डॉलर से ज़्यादा है, उन पर अधिकृत डीलरों को रुपये में मूल्य के 20 प्रतिशत के बराबर नक़द राशि फ़ॉरेक्स रिस्क रिज़र्व के रूप में आरबीआई के पास रखनी होगी। यह नियम उन अनुबंधों पर लागू होगा जिनमें चालू खाते के जोखिम से बचाव के लिए रुपये के बदले विदेशी मुद्रा ख़रीदी जाती है। डीलरों को ग्राहकों से यह लिखित भरोसा भी लेना होगा कि यही जोखिम किसी दूसरे डीलर के ज़रिये हेज नहीं किया गया है।

इन क़दमों की पृष्ठभूमि रुपये की कमज़ोरी है। शुक्रवार को एक डॉलर के मुक़ाबले रुपया 96.73 पर बंद हुआ, जो मई के 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर से ज़्यादा दूर नहीं है। विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार चार हफ़्तों से घट रहा है। 2 अक्टूबर वाले हफ़्ते में 12.95 अरब डॉलर की कमी के बाद यह 734.60 अरब डॉलर पर आ गया।

स्रोत: आज तक

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