सोने में पैसा लगाने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फ़ंड (ईटीएफ़) के मामले में इस साल ब्रिटेन ने चीन को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के आँकड़ों के अनुसार 2026 में जनवरी से सितंबर तक ब्रिटेन में सूचीबद्ध गोल्ड फ़ंड्स में 9.50 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। चीन में सूचीबद्ध फ़ंड्स के लिए यह आँकड़ा 9.46 अरब डॉलर रहा।
ब्रिटेन में ज़्यादातर पैसा तीसरी तिमाही में आया। इस दौरान वहाँ के फ़ंड्स में क़रीब 7.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो लगभग 54 टन सोने के बराबर है। 25 सितंबर को ख़त्म हुए 13 हफ़्तों में सिर्फ़ एक हफ़्ता ऐसा रहा जब ब्रिटेन के फ़ंड्स में निवेश नहीं बढ़ा। 2022 के बाद यह इस तरह का सबसे लंबा सिलसिला है।
दिलचस्प यह है कि डब्ल्यूजीसी के अपने मॉडल ने ब्रिटेन के लिए इस तिमाही में क़रीब 18 टन के निवेश का अनुमान लगाया था, जबकि असल आँकड़ा लगभग 54 टन रहा। क़रीब 36 टन के इस फ़र्क़ को ब्रिटेन के दूसरे आर्थिक या वित्तीय संकेतक काफ़ी हद तक नहीं समझा पाए।
डब्ल्यूजीसी ने इसकी कुछ संभावित वजहें बताई हैं, हालाँकि इन्हें पक्के तौर पर साबित नहीं माना गया है। जुलाई से ब्रिटिश सरकारी बॉन्ड के टर्म प्रीमियम बढ़े हैं, और बाज़ार के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने कम अवधि के बॉन्ड और सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों का रुख़ किया है। साल की शुरुआत में गोल्ड ईटीएफ़ के प्रवाह और टर्म प्रीमियम के बीच संबंध कमज़ोर था, जो तीसरी तिमाही में मज़बूत होता दिखा।
महँगाई, सरकारी ख़ज़ाने की हालत और बॉन्ड बाज़ार की अस्थिरता को लेकर चिंताओं को भी सोने की ओर इस झुकाव की वजह माना जा रहा है।
स्रोत: आज तक




