ख़ैबर पख़्तूनख़्वा की राजधानी पेशावर में कई मुख्य सड़कों पर कंटेनर खड़े कर दिए गए हैं और दंगा-रोधी साज़ो-सामान के साथ पुलिस व सुरक्षा बल तैनात हैं। यह सख़्ती पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के उस फ़ैसले के बाद दिखी, जिसके तहत रविवार, 11 अक्टूबर को प्रांत में आपातकाल घोषित किया गया और इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई की चुनी हुई सरकार निलंबित कर दी गई।
प्रांत में पीटीआई का एक मार्च 4 अक्टूबर से चल रहा है। लक्की मरवत से निकले इस मार्च की अगुवाई मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी कर रहे हैं, और इसकी मुख्य माँग इमरान ख़ान की रिहाई है, जो 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। पार्टी इस्लामाबाद पहुँचकर धरने की योजना बना रही थी, लेकिन संघीय सरकार साफ़ कर चुकी है कि प्रदर्शनकारियों को राजधानी में आने नहीं दिया जाएगा। अफ़रीदी का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण रहेगा।
शहबाज़ शरीफ़ सरकार इस क़दम को सुरक्षा से जोड़ती है। उसका तर्क है कि प्रांत में आतंकी घटनाएँ बढ़ी हैं, हालात बिगड़े हैं और प्रांतीय सरकार उन पर क़ाबू नहीं पा सकी। संघीय कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को आपातकाल की सलाह दी थी।
जब तक आपातकाल लागू है, निर्वाचित प्रांतीय सरकार की भूमिका सिमटी रहेगी। केंद्र प्रशासन की ज़िम्मेदारी पूरी या आंशिक रूप से राज्यपाल को दे सकता है, और विधानसभा के काम संसद के ज़रिये हो सकते हैं।
फ़ैसले पर प्रतिक्रियाएँ बँटी हुई हैं। राज्यपाल फ़ैसल करीम कुंडी ने इसे सही ठहराते हुए लोगों से सुरक्षा बलों का साथ देने को कहा है, जबकि पीटीआई की प्रांतीय इकाई इसे संविधान के ख़िलाफ़ बता रही है।
स्रोत: आज तक




