जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार में इस समय तीन मंत्री पद ख़ाली हैं। 90 सदस्यों वाली विधानसभा में मंत्रिपरिषद सदन की संख्या के 10 प्रतिशत तक हो सकती है, जबकि अभी मुख्यमंत्री समेत केवल छह मंत्री हैं। इन्हीं ख़ाली पदों के कारण मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं।
सूत्रों के हवाले से आई ख़बरों के मुताबिक़ इस पर फ़ैसला अगले हफ़्ते हो सकता है, और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जगह नए चेहरे लाए जा सकते हैं। आधिकारिक तौर पर अभी कुछ तय नहीं है। नेशनल कॉन्फ़्रेंस (एनसी) की यह सरकार 16 अक्टूबर को दो साल पूरे कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस की भूमिका का है। 2024 का चुनाव एनसी के साथ मिलकर लड़ने वाली कांग्रेस अब तक सरकार में शामिल नहीं हुई है और बाहर से समर्थन दे रही है। उसकी घोषित शर्त यह है कि पहले जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल हो। सूत्रों के अनुसार एनसी उसे एक मंत्री पद देने को तैयार है, पर कांग्रेस के लिए यह पेशकश कम है।
मुख्यमंत्री ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ख़बरों के अनुसार उन्होंने कहा था कि विधानसभा सत्र के बाद वे इस बारे में एनसी अध्यक्ष और अपने पिता फ़ारूक़ अब्दुल्ला की राय लेंगे।
विपक्ष इस देरी को अलग नज़र से देखता है। भाजपा का आरोप है कि पार्टी में बिखराव के डर से फेरबदल टाला जा रहा है। एनसी ने इसे ख़ारिज किया है और कहा है कि सरकार अपने पाँच साल पूरे करेगी।
स्रोत: आज तक




